राजनीतिक सिद्धांत के दृष्टिकोण: नॉर्मेटिव, ऐतिहासिक और अनुभवजन्य

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राजनीतिक सिद्धांत, राजनीति विज्ञान की सबसे पुरानी शाखाओं में से एक है, जिसकी जड़ें प्राचीन यूनान (Ancient Greece) तक जाती हैं। लेकिन हर विचारक राजनीति को एक ही तरह से नहीं पढ़ता। कुछ विचारक पूछते हैं — “शासन को क्या करना चाहिए?” — यही नॉर्मेटिव दृष्टिकोण है। कुछ पूछते हैं — “यह विचार कैसे विकसित हुआ?” — यह ऐतिहासिक दृष्टिकोण है। और कुछ सीधे पूछते हैं — “राजनीति में वास्तव में हो क्या रहा है?” — यह अनुभवजन्य दृष्टिकोण है। 

यह पोस्ट DSC-1 (Understanding Political Theory) की Unit 2 को कवर करता है — DU Political Science Semester 1 की परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली इकाइयों में से एक। अगर आपने अभी Unit 1 नहीं पढ़ी है, तो पहले राजनीति क्या है? Theorizing the Political — Unit 1 नोट्स पढ़ लें, क्योंकि यह अध्याय उसी आधार पर बना है। 

दृष्टिकोण (Approach) का क्या अर्थ है? 

एक दृष्टिकोण (approach) वह मापदंड है जिसके आधार पर कोई विद्वान तय करता है कि कौन-से प्रश्न और आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, जबकि पद्धति (method) वह तकनीक है जिससे वह डेटा इकट्ठा और विश्लेषित करता है। मोटे तौर पर, राजनीतिक सिद्धांत के दृष्टिकोण दो युगों में बंटे हैं: पारंपरिक दृष्टिकोण (द्वितीय विश्व युद्ध तक प्रभावी — नॉर्मेटिव और ऐतिहासिक) और समकालीन दृष्टिकोण (द्वितीय विश्व युद्ध के बाद — अनुभवजन्य/व्यवहारवादी)। यह इकाई तीनों को कवर करती है। 

1. नॉर्मेटिव (मानक) दृष्टिकोण 

नॉर्मेटिव दृष्टिकोण यह पूछता है कि “क्या होना चाहिए?” — न कि “क्या है”। यह प्रकृति में निर्देशात्मक (prescriptive) है, वर्णनात्मक (descriptive) नहीं — यह उन मूल्यों और आदर्शों से जुड़ा है जिन्हें राजनीतिक जीवन को निर्देशित करना चाहिए, न कि यह बताने से कि राजनीति वास्तव में कैसे काम करती है। 

नॉर्मेटिव दृष्टिकोण के प्रमुख अवधारणाएं 

न्याय (Justice) — राजनीतिक बहसों के केंद्र में, न्याय समाज में लाभों और बोझ के उचित वितरण से जुड़ा है। वितरणात्मक न्याय (distributive justice) संसाधनों के बंटवारे पर केंद्रित है, जबकि सुधारात्मक न्याय (corrective justice) गलतियों को सुधारने पर। इस बहस को गहराई से समझने के लिए देखें — जॉन रॉल्स का न्याय सिद्धांत — DSC-7 नोट्स

स्वतंत्रता (Liberty) — व्यक्ति की बिना बाहरी हस्तक्षेप के कार्य करने और सोचने की स्वतंत्रता। इसाइया बर्लिन (Isaiah Berlin) का नकारात्मक स्वतंत्रता (हस्तक्षेप से आज़ादी) और सकारात्मक स्वतंत्रता (आत्म-साक्षात्कार की आज़ादी) के बीच का क्लासिक भेद यहाँ केंद्रीय है। 

समानता (Equality) — व्यक्तियों या समूहों को समान मानना, और सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक कारणों से उत्पन्न असमान परिणामों को संबोधित करना। 

न्याय, स्वतंत्रता और समानता को नॉर्मेटिव राजनीतिक सिद्धांत की मूल अवधारणाओं के रूप में दिखाता इन्फोग्राफिक
न्याय, स्वतंत्रता और समानता — नॉर्मेटिव राजनीतिक सिद्धांत के तीन केंद्रीय स्तंभ हैं।

नॉर्मेटिव दृष्टिकोण की आलोचना 

आलोचकों — विशेष रूप से लॉजिकल पॉज़िटिविस्ट और व्यवहारवादियों (behaviouralists) — का तर्क है कि न्याय और स्वतंत्रता जैसी अमूर्त अवधारणाओं को वस्तुनिष्ठ रूप से परिभाषित या मापना कठिन है। चूंकि मूल्य समाजों के अनुसार भिन्न होते हैं, नॉर्मेटिव सिद्धांत को अक्सर अवैज्ञानिक या केवल काल्पनिक (“आर्मचेयर थ्योराइज़िंग”, जैसा डेविड ईस्टन ने कहा) माना जाता है। 

2. ऐतिहासिक दृष्टिकोण 

ऐतिहासिक दृष्टिकोण राजनीतिक विचारों और संस्थाओं का अध्ययन उनके समय के संदर्भ में करता है, यह देखते हुए कि वे कैसे विकसित हुए और उन्हें किसने आकार दिया। 

प्रमुख विचारक और कालखंड 

कालखंड विचारक योगदान 
प्राचीन यूनानी प्लेटो, अरस्तू लोकतंत्र, गणराज्यवाद, प्राकृतिक विधि, आदर्श राज्य 
मध्यकालीन ऑगस्टीन, एक्विनास दैवीय सत्ता, प्राकृतिक अधिकार, सामूहिक हित 
आधुनिक (सामाजिक अनुबंध) हॉब्स, लॉक, रूसो, कांट सहमति, संप्रभुता, नागरिकों के अधिकार व कर्तव्य 
प्रबोधन युग (Enlightenment) मॉन्टेस्क्यू, वॉल्टेयर, एडम स्मिथ तर्क, अनुभववाद, राजनीति व अर्थशास्त्र में उदारवाद 
क्रांतिकारी पेन, जेफरसन, मार्क्स मौजूदा व्यवस्था की आलोचना; लोकतंत्र, समानता, मुक्ति 
समकालीन रॉल्स, नॉज़िक, हैबरमास न्याय, वैश्वीकरण, बहुलतावाद, सिद्धांत में संघर्ष 

जिन विचारकों ने इन शास्त्रीय परंपराओं के विरुद्ध प्रतिक्रिया दी, उनके लिए देखें — राजनीतिक सिद्धांत की परंपराएं: उदारवाद, मार्क्सवाद, अराजकतावाद और रूढ़िवाद — Unit 3 नोट्स

प्लेटो से रॉल्स तक प्रमुख विचारकों को दिखाती ऐतिहासिक दृष्टिकोण की टाइमलाइन
ऐतिहासिक दृष्टिकोण राजनीतिक विचारों को प्लेटो के एथेंस से लेकर रॉल्स के न्याय सिद्धांत तक ट्रेस करता है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण की आलोचना 

ऐतिहासिक दृष्टिकोण काफी हद तक व्याख्या (interpretation) पर निर्भर करता है — अलग-अलग विद्वान एक ही ग्रंथ को अलग तरह से पढ़ सकते हैं। साथ ही, किन स्रोतों का अध्ययन किया जाए इसमें चयन-पूर्वाग्रह (selection bias) का जोखिम भी रहता है, और पुराने विचारों को आज के मुद्दों से सार्थक रूप से जोड़ने की चुनौती भी। 

3. अनुभवजन्य (एम्पिरिकल) दृष्टिकोण 

अनुभवजन्य दृष्टिकोण राजनीति में वास्तव में क्या होता है, इसका अध्ययन वैज्ञानिक, अवलोकन-आधारित पद्धतियों से करता है, न कि मूल्य-निर्णयों से। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद व्यवहारवाद (behaviouralism) के उदय के साथ इसका प्रभुत्व बढ़ा। 

पद्धतियां और उपकरण 

  • सांख्यिकीय विश्लेषण — संख्यात्मक राजनीतिक आंकड़ों से निष्कर्ष निकालना 
  • सर्वेक्षण (Surveys) — प्रश्नावली के माध्यम से संरचित मत-डेटा जुटाना 
  • प्रयोग (Experiments) — किसी विशेष राजनीतिक परिकल्पना का नियंत्रित परीक्षण 
  • केस स्टडी — किसी एक घटना या संस्था का गहन अध्ययन 

प्रमुख अध्ययन विषय 

राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण, राजनीतिक सहभागिता, मतदान व्यवहार, राजनीतिक दल, दबाव समूह, सामाजिक आंदोलन, राजनीतिक नेतृत्व, और संस्थागत जवाबदेही — इनमें से कई विषय लोकतंत्र: विचार और व्यवहार — DSC-7 नोट्स में फिर से आते हैं। 

अनुभवजन्य राजनीतिक सिद्धांत की पांच शोध पद्धतियों का आइकन ग्रिड
सांख्यिकी, सर्वेक्षण, प्रयोग, केस स्टडी और तुलनात्मक विश्लेषण — अनुभवजन्य दृष्टिकोण के पांच मुख्य उपकरण।

अनुभवजन्य दृष्टिकोण की आलोचना 

राजनीतिक अवधारणाओं को वस्तुनिष्ठ रूप से मापना कठिन है; राजनीतिक व्यवहार जटिल और लगातार बदलता रहता है; और यह सवाल भी बना रहता है कि अनुभवजन्य निष्कर्ष वास्तव में कितने विश्वसनीय और सामान्यीकरण योग्य हैं — खासकर जब वे “मूल्य-मुक्त” होने का दावा करते हुए भी शोधकर्ता द्वारा चुनी गई श्रेणियों पर निर्भर रहते हैं। 

नॉर्मेटिव बनाम ऐतिहासिक बनाम अनुभवजन्य — त्वरित तुलना 

आधार नॉर्मेटिव दृष्टिकोण ऐतिहासिक दृष्टिकोण अनुभवजन्य दृष्टिकोण 
मूल प्रश्न क्या होना चाहिएयह कैसे विकसित हुआ? वास्तव में क्या हो रहा है
प्रकृति निर्देशात्मक (Prescriptive) व्याख्यात्मक (Interpretive) वर्णनात्मक/वैज्ञानिक 
पद्धति दार्शनिक तर्क पाठ्य व सांदर्भिक विश्लेषण सांख्यिकी, सर्वेक्षण, प्रयोग 
प्रमुख विचारक रॉल्स, नॉज़िक प्लेटो, हॉब्स, लॉक ईस्टन, आलमंड 
मुख्य आलोचना मूल्यों को वस्तुनिष्ठ रूप से सत्यापित करना कठिन स्रोत-चयन में पूर्वाग्रह का जोखिम “मूल्य-मुक्त” होने का दावा विवादित 
प्रभावी काल प्राचीन काल–18वीं सदी, 1970 के बाद पुनरुत्थान द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व द्वितीय विश्व युद्ध के बाद (व्यवहारवाद) 

तीनों दृष्टिकोण को और अधिक जानने के लिए देखें – eGyankosh IGNOU Unit 1 सामग्री

निष्कर्ष 

राजनीतिक सिद्धांत के अध्ययन में हर दृष्टिकोण अपना अलग योगदान देता है: नॉर्मेटिव दृष्टिकोण बताता है कि क्या होना चाहिए, ऐतिहासिक दृष्टिकोण यह समझाता है कि विचार यहाँ तक कैसे पहुंचे, और अनुभवजन्य दृष्टिकोण यह मापता है कि वास्तव में क्या है। DU परीक्षाओं के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति यह है कि आप तीनों को परिभाषित कर सकें, हर दृष्टिकोण के लिए दो विचारकों के नाम बता सकें, और हर एक की एक आलोचना लिख सकें — जो कि नीचे दिए PYQs में बिल्कुल यही टेस्ट करते हैं।

टॉप DU पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 

DU Previous Year Questions

Frequently asked questions from DU exam papers on this topic. Tap a question to view a quick-answer guide.

1 राजनीतिक सिद्धांत के अध्ययन में नॉर्मेटिव और अनुभवजन्य दृष्टिकोण के बीच अंतर बताइए। +
Hint: “क्या होना चाहिए” बनाम “क्या है” के भेद पर फोकस करें और दोनों पक्षों के लिए एक-एक विचारक/उदाहरण दें। Short Answer
2 “राजनीतिक सिद्धांत को ऐतिहासिक दृष्टिकोण ने समृद्ध किया है।” चर्चा कीजिए। +
Hint: उत्तर को कालखंडवार (प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक → समकालीन) संरचित करें और अंत में कम से कम एक आलोचना जोड़ें। Long Answer
3 उपयुक्त उदाहरणों सहित नॉर्मेटिव राजनीतिक सिद्धांत की प्रमुख अवधारणाओं की व्याख्या कीजिए। +
Hint: न्याय, स्वतंत्रता और समानता को अलग-अलग कवर करें; न्याय के लिए रॉल्स और स्वतंत्रता के लिए बर्लिन के नकारात्मक/सकारात्मक भेद का उपयोग करें। Long Answer
4 राजनीति विज्ञान के अनुभवजन्य दृष्टिकोण से क्या तात्पर्य है? इसकी प्रमुख पद्धतियों की चर्चा कीजिए। +
Hint: पांचों पद्धतियों — सांख्यिकी, सर्वेक्षण, प्रयोग, केस स्टडी, तुलनात्मक विश्लेषण — को सूचीबद्ध कर संक्षेप में परिभाषित करें। Short Answer
5 राजनीतिक सिद्धांत के नॉर्मेटिव दृष्टिकोण की सीमाओं की समालोचनात्मक विवेचना कीजिए। +
Hint: व्यवहारवादी आलोचना पर केंद्रित रहें — कि मूल्यों को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित नहीं किया जा सकता। Short Answer

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

राजनीतिक सिद्धांत के तीन प्रमुख दृष्टिकोण कौन-से हैं?

तीन प्रमुख दृष्टिकोण हैं — नॉर्मेटिव दृष्टिकोण (मूल्य और आदर्श), ऐतिहासिक दृष्टिकोण (विचारों का समय के साथ विकास), और अनुभवजन्य दृष्टिकोण (राजनीतिक व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन)।

नॉर्मेटिव और अनुभवजन्य दृष्टिकोण में एक पंक्ति में क्या अंतर है?

नॉर्मेटिव दृष्टिकोण पूछता है कि राजनीतिक जीवन क्या होना चाहिए; अनुभवजन्य दृष्टिकोण अवलोकन योग्य प्रमाणों के आधार पर यह अध्ययन करता है कि राजनीतिक जीवन वास्तव में क्या है। 

ऐतिहासिक दृष्टिकोण के प्रमुख विचारक कौन हैं?

प्रमुख विचारकों में प्लेटो और अरस्तू (प्राचीन यूनानी), ऑगस्टीन और एक्विनास (मध्यकालीन), हॉब्स, लॉक और रूसो (आधुनिक), तथा रॉल्स, नॉज़िक और हैबरमास (समकालीन) शामिल हैं। 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अनुभवजन्य दृष्टिकोण प्रभावी क्यों हुआ?

राजनीति विज्ञानियों ने इस विषय को अधिक वैज्ञानिक और कठोर बनाने की कोशिश की, दार्शनिक अटकलों से हटकर अवलोकन, डेटा और परीक्षण योग्य परिकल्पनाओं की ओर रुख किया — इसी को व्यवहारवाद (behaviouralism) कहा जाता है। 

क्या यह टॉपिक DU BA Political Science परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है?

हाँ — DSC-1 (Understanding Political Theory) की Unit 2 अक्सर परीक्षा में पूछी जाती है, आमतौर पर एक Short या Long Answer प्रश्न के रूप में जिसमें छात्रों से तीनों में से किन्हीं दो दृष्टिकोणों में अंतर बताने को कहा जाता है। 

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